हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 33.22

अध्याय 33 → मंत्र 22 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
आ॒तिष्ठ॑न्तं॒ परि॒ विश्वे॑ऽअभूष॒ञ्छ्रियो॒ वसा॑नश्चरति॒ स्वरो॑चिः।म॒हत्तद् वृष्णो॒ऽअसु॑रस्य॒ नामा वि॒श्वरू॑पोऽअ॒मृता॑नि तस्थौ ॥ (२२)
इंद्र देव प्रकाशमान और वैभववान हैं. सभी देवताओं ने मिल कर उन की प्रतिष्ठा की है. सभी देव चारों ओर से घेर कर उन की उपासना करते हैं. वे महान्‌ व विश्वरूप हैं. कई असुरों को मार कर उन्होंने ख्याति पाईं है. वे अमर हैं. (२२)
Indra Dev is bright and brilliant. All the gods have honored them together. All the gods surround them and worship them. He is a great worldview. He has gained fame by killing many asuras. They are immortal. (22)