यजुर्वेद (अध्याय 33)
आ तत्त॑ऽइन्द्रा॒यवः॑ पनन्ता॒भि यऽऊ॒र्वं गोम॑न्तं॒ तितृ॑त्सान्।स॒कृ॒त्स्वं] ये पु॑रुपु॒त्रां म॒ही स॒हस्र॑धारां बृह॒तीं दुदु॑क्षन् ॥ (२८)
हे इंद्र देव! आप गोस्वामियों के घातकों व भूपतियों (भूमिस्वामी) के हत्यारों को मारते हैं. पृथ्वी पर सहस्तरों धाराओं वाले सोम को निचोड़ते हैं. उस का दोहन करते हैं. श्रेष्ठ कर्मो वाले आप के पुत्र आप की महिमा का गान करते हैं. (२८)
O Lord Indra! You kill the killers of the cow owners and the killers of the land owners. On earth, the earth is squeezed by thousands of streams. Let's exploit that. Your sons with the best deeds sing your glory. (28)