यजुर्वेद (अध्याय 33)
इ॒मां ते॒ धियं॒ प्र भ॑रे म॒हो म॒हीम॒स्य स्तो॒त्रे धि॒षणा॒ यत्त॑ऽआन॒जे।तमु॑त्स॒वे च॑ प्रस॒वे च॑ सास॒हिमिन्द्रं॑ दे॒वासः॒ शव॑सामद॒न्ननु॑ ॥ (२९)
हे इंद्र! हम आप की बुद्धि को धारण करते हैं. आप महान व पृथ्वी का भरणपोषण करने में समर्थ हैं. हम आप की स्तुति करते हैं. उत्सव और प्रसव के समय हमें कष्ट पहुंचाने वाले शत्रुओं का साहसी इंद्र देव दमन करते हैं. देवगण भी आनंदित हो कर इंद्र देव के गुण गाते हैं. (२९)
O Indra! We hold your intellect. You are great and capable of sustaining the earth. We praise you. The courageous Indra Dev suppresses the enemies who hurt us at the time of celebration and delivery. Devgan also sings the virtues of Indra Dev with joy. (29)