हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 33.30

अध्याय 33 → मंत्र 30 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
वि॒भ्राड् बृ॒हत् पि॑बतु सो॒म्यं मध्वायु॒र्दध॑द् य॒ज्ञप॑ता॒ववि॑ह्रुतम्।वात॑जूतो॒ योऽअ॑भि॒रक्ष॑ति॒ त्मना॑ प्र॒जाः पु॑पोष पुरु॒धा वि रा॑जति ॥ (३०)
हे इंद्र देव! आप चमकीले व विशाल हैं. आप सोमरस को पीने की कृपा कीजिए. सोमरस मधुर है. हम यज्ञ में आप का आह्वान करते हैं. आप अपनी प्रजा की सर्वविधि (सब प्रकार से) रक्षा करते हैं. आप प्रजा का पालनपोषण और उ्हें बहुविधि प्रकाशित करते हैं. (३०)
O Lord Indra! You are bright and huge. Please drink Somers. Somers is sweet. We invoke you in yajna. You protect your people in every way. You nurture the people and publish them multiplicity. (30)