यजुर्वेद (अध्याय 33)
मि॒त्रꣳ हु॑वे पू॒तद॑क्षं॒ वरु॑णं च रि॒शाद॑सम्।धियं॑ घृ॒ताची॒ साध॑न्ता ॥ (५७)
मित्र देव और वरुण देव पवित्रतादायी, दक्ष और पाप धोने बाले हैं. हम घी से सींची हुई, साधी हुई बुद्धि से उन की आराधना करते हैं. (५७)
Mitra Dev and Varun Dev are pure, efficient and sin-washers. We worship them with a watered, simple intellect with ghee. (57)