हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 33.68

अध्याय 33 → मंत्र 68 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
य॒ज्ञो दे॒वानां॒ प्रत्ये॑ति सु॒म्नमादि॑त्यासो॒ भव॑ता मृड॒यन्तः॑।आ वो॒ऽर्वाची॑ सुम॒तिर्व॑वृत्याद॒ꣳहोश्चि॒द्या व॑रिवो॒वित्त॒रास॑त् ॥ (६८)
हे यजमानो! हम देवताओं के प्रति यज्ञ करते हैं. हे आदित्य देव! आप अच्छे मन वाले हैं. आप सुखदाता हैं. आप हमें सुमति दीजिए. आप शत्रुओं की बुद्धि को हमारे प्रति अनुकूल करने की कृपा कीजिए. (६८)
O host! We perform yajna to the gods. O Aditya Dev! You are good-minded. You are pleasant. You give us permission. Please adapt the intelligence of your enemies towards us. (68)