यजुर्वेद (अध्याय 33)
ऋध॑गि॒त्था स मर्त्यः॑ शश॒मे दे॒वता॑तये।यो नू॒नं मि॒त्रावरु॑णाव॒भिष्ट॑यऽआच॒क्रे ह॒व्यदा॑तये ॥ (८७)
जो मनुष्य अपने सुख के लिए आप का आह्वान करते हैं, निश्चय ही जो मनुष्य अपने अभीष्ट की पूर्ति के लिए मित्र देव और वरुण देव का आह्वान करते हैं, हवि देने के लिए मनुष्य आप का आह्वान करते हैं. आप उन का अभीष्ट पूरा करने की कृपा कीजिए. (८७)
The people who call upon you for their happiness, surely the people who invoke the friend God and Varuna Dev to fulfill their desire, the human beings call upon you to give them. Please fulfill their wishes. (87)