यजुर्वेद (अध्याय 33)
प्रैतु॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॒ प्र दे॒व्येतु सू॒नृता॑।अच्छा॑ वी॒रं नर्य्यं॑ प॒ङ्क्तिरा॑धसं दे॒वा यज्ञं॒ न॑यन्तु नः ॥ (८९)
हे अश््विनीकुमारो! आप यज्ञ में पधारने, दिव्य तथा सत्यवाणी प्रदान करने की कृपा कीजिए. देवगण मनुष्यों के हितैषी हैं. वे यज्ञ में पंक्ति में पधारें और शत्रुनाश की कृपा करें. (८९)
O Ashwini Kumaro! Please come to the yajna, give divine and truthfulness. Devgans are well-wishers of human beings. They should come in line in the yajna and please destroy the enemy. (89)