हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 34.22

अध्याय 34 → मंत्र 22 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
त्वमि॒माऽओष॑धीः सोम॒ विश्वा॒स्त्वम॒पोऽअ॑जनय॒स्त्वं गाः।त्वमा त॑तन्थो॒र्वन्तरि॑क्षं॒ त्वं ज्योति॑षा॒ वि तमो॑ ववर्थ ॥ (२२)
हे सोम! आप इन सभी ओघधियों को उपजाते हैं. आप ने जल को उपजाया. आप ने गायों को उपजाया. आप ने अंतरिक्ष का विस्तार किया. आप ने संसार को ज्योतिष्मान बनाया. आप ने अंधकार दूर करने की कृपा की. (२२)
O Mon! You grow all these oozings. You raised the water. You raised cows. You expanded the space. You made the world astrological. You have been kind to remove darkness. (22)