यजुर्वेद (अध्याय 34)
अप्न॑स्वतीमश्विना॒ वाच॑म॒स्मे कृ॒तं नो॑ दस्रा वृषणा मनी॒षाम्।अ॒द्यूत्येऽव॑से॒ नि ह्व॑ये वां वृ॒धे च॑ नो भवतं॒ वाज॑सातौ ॥ (२९)
हे अश्विनीकुमारो! आप दर्शनीय व शक्तिमान हैं. आप हमारी वाणी को अच्छे कार्य में लगाइए. हे अश्विनीकुमारो! आप हमारी मनीषा (बुद्धि) को अच्छे कार्य में लगाइए. (२९)
O Ashwinikumaro! You are visible and powerful. You put our speech into good work. O Ashwinikumaro! You put our Manisha (intellect) into good work. (29)