यजुर्वेद (अध्याय 34)
द्युभि॑र॒क्तुभिः॒ परि॑ पातम॒स्मानरि॑ष्टेभिरश्विना॒ सौभ॑गेभिः।तन्नो॑ मि॒त्रो वरु॑णो मामहन्ता॒मदि॑तिः॒ सिन्धुः॑ पृथि॒वीऽउ॒त द्यौः ॥ (३०)
हे अश्विनीकुमारो! आप आज ही अपने रक्षा साधनों सहित इस यज्ञ में पधारने व उस की बढ़ोतरी करने की कृपा कीजिए. आप द्वारा प्रदान किए गए धन की रक्षा में मित्र देव, वरुण देव, अदिति देव, सिंधु देव, पृथ्वीलोक हमारी सहायता करों. आप द्वारा प्रदान किए गए धन की रक्षा में स्वर्गलोक हमारी सहायता करें. (३०)
O Ashwinikumaro! Please increase this yajna with your defense tools today. Help us mitra dev, varun dev, aditi dev, sindhu dev, prithvilok in protecting the money provided by you. Help us in protecting the wealth provided by you. (30)