यजुर्वेद (अध्याय 34)
ब्रह्म॑णस्पते॒ त्वम॒स्य य॒न्ता सू॒क्तस्य॑ बोधि॒ तन॑यं च जिन्व।विश्वं॒ तद्भ॒द्रं यदव॑न्ति दे॒वा बृ॒हद्व॑देम वि॒दथे॑ सु॒वीराः॑।य इ॒मा विश्वा॑। वि॒श्वक॑र्म्मा। यो नः॑ पि॒ता।अन्न॑प॒तेऽन्न॑स्य नो देहि ॥ (५८)
हे देवगण! आप संसार के नियंत्रक हैं. आप भलीभांति हमारी आकांक्षा को जानते हैं. आप भलीभांति हमारी प्रार्थना को जानते हैं. आप हमें और हमारी संतानों को पोसते हैं. आप हमें सभी प्रकार के कल्याण उपलब्ध कराइए. आप की कृपा से हमारी संतान वीर व महिमावान हो. आप सब कार्यो के कर्ता, पालक व अन्नपति हैं. (५८)
O God! You are the controller of the world. You know our aspirations very well. You know our prayers very well. You feed us and our children. You provide us with all kinds of welfare. By your grace, may our children be brave and glorious. You are the doer of all the work, the guardian and the food. (58)