हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

अध्याय 35 के सभी मंत्र

यजुर्वेद अध्याय 35 के सभी मंत्र हिंदी अर्थ के साथ

यजुर्वेद (अध्याय 35)

यजुर्वेद:
अपे॒तो य॑न्तु प॒णयोऽसु॑म्ना देवपी॒ययवः॑।अ॒स्य लो॒कः सु॒ताव॑तःद्युभि॒रहो॑भिर॒क्तुभि॒र्व्यक्तं य॒मो द॑दात्वव॒सान॑मस्मै ॥ (१)
चोर व जो अच्छे मन वाले नहीं हैं, वे इस स्थान से दूर चले जाएं. देवताओं के पीड़क इस स्थान से दूर चले जाएं. यह लोक हम देवपुत्रों का है. यम देव दिन और रात में अभिव्यक्त इस उत्तम स्थान को हमारे लिए प्रदान करने की कृपा करें. (१)
Thieves who are not good-minded should move away from this place. The torsions of the gods should move away from this place. This is the people of us sons of Gods. May Yama Dev be pleased to provide this wonderful place for us expressed in day and night. (1)

यजुर्वेद (अध्याय 35)

यजुर्वेद:
स॒वि॒ता ते॒ शरी॑रेभ्यः पृथि॒व्यां लो॒कमि॑च्छतु।तस्मै॑ युज्यन्तामु॒स्रियाः॑ ॥ (२)
सविता देव आप के शरीर के लिए पृथ्वीलोक की इच्छा करने की कृपा करों. वे पृथ्वीलोक को पशुओं से जोड़ने की कृपा करें. (२)
Savita Dev, please wish earth for your body. May they be pleased to connect the earth with animals. (2)

यजुर्वेद (अध्याय 35)

यजुर्वेद:
वा॒युः पु॑नातु सवि॒ता पु॑नात्व॒ग्नेर्भ्राज॑सा॒ सूर्य॑स्य॒ वर्च॑सा।वि मु॑च्यन्तामु॒स्रियाः॑ ॥ (३)
वायु देव व सविता देव इस स्थान को पवित्र बनाने की कृपा करों. सूर्य देव इस स्थान को वर्चस्वी बनाने की कृपा करें. बंधे हुए गायों और बैलों को खोल दिया जाए. (३)
Please vayu dev and savita dev to make this place holy. May the Sun God be pleased to make this place dominated. Tied cows and bulls should be opened. (3)

यजुर्वेद (अध्याय 35)

यजुर्वेद:
अ॒श्व॒त्थे वो॑ नि॒षद॑नं प॒र्णे वो॑ वस॒तिष्कृ॒ता।गो॒भाज॒ऽइत्किला॑सथ॒ यत्स॒नव॑थ॒ पू॑रुषम् ॥ (४)
पीपल और पलाश वृक्षों पर वास करने वाली ओषधियों से निवेदन है कि वे यजमान को गायों को कांति से युक्त करने की कृपा करें. आप यजमान को पौरुष युक्त करने की कृपा करें. (४)
The medicines living on peepal and palash trees are requested to please the host to bury the cows with kanti. Please make the host virtuous. (4)

यजुर्वेद (अध्याय 35)

यजुर्वेद:
स॒वि॒ता ते॒ शरी॑राणि मा॒तुरु॒पस्थ॒ऽआ व॑पतु।तस्मै॑ पृथिवि॒ शं भ॑व ॥ (५)
सविता देव यजमान के शरीर को पृथ्वी माता की गोद में बैठाने की कृपा करों. पृथ्वी माता का हम आह्वान करते हैं. वे उन सब के लिए सुखदायी तथा कल्याणकारी हो. (५)
Please place the body of Savita Dev host on the lap of Mother Earth. We call upon Mother Earth. May they be happy and beneficial for all of them. (5)

यजुर्वेद (अध्याय 35)

यजुर्वेद:
प्र॒जाप॑तौ त्वा दे॒वता॑या॒मुपो॑दके लो॒के नि द॑धाम्यसौ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ॥ (६)
प्रजापति देव को हम जल के पास स्थापित करते हैं. वे इस जल को धारण करने और हमें पवित्र बनाने की कृपा करों. (६)
We install Prajapati Dev near water. May they bless us with this water and make us holy. (6)

यजुर्वेद (अध्याय 35)

यजुर्वेद:
परं॑ मृत्यो॒ऽ अनु॒ परे॑हि॒ पन्थां॒ यस्ते॑ऽ अ॒न्यऽ इत॑रो देव॒याना॑त्।चक्षु॑ष्मते शृण्व॒ते ते॑ ब्रवीमि॒ मा नः॑ प्र॒जा री॑रिषो॒ मोत वी॒रान् ॥ (७)
मृत्यु का पथ दूसरा है. उन का पथ देवताओं के पथ से भिन्न है. आप दूसरे पथ से लौट जाने की कृपा करें. आप नेत्रवान हैं. आप श्रवण क्षमता युक्त हैं. आप से अनुरोध है कि आप हमारी प्रजा व वीरों का नाश मत कीजिए, (७)
The path to death is another. Their path is different from the path of the gods. Please go back from another path. You are blind. You are hearing impaired. You are requested not to destroy our people and heroes, (7)

यजुर्वेद (अध्याय 35)

यजुर्वेद:
शं वातः॒ शꣳ हि ते॒ घृणिः॒ शं ते॑ भव॒न्त्विष्ट॑काः।शं ते॑ भवन्त्व॒ग्नयः॒ पार्थि॑वासो॒ मा त्वा॒भि शू॑शुचन् ॥ (८)
वायु हमारे लिए सुखदायी हो. सूर्य हमारे लिए सुखदायी हो. इष्टिका देव हमारे लिए कल्याणदायी हो. अग्नि हमारे लिए कल्याणदायी हो. ये सभी पृथ्वी पर किसी को भी सोच एवं संताप न दें. (८)
May the air be pleasant for us. May the sun be pleasant for us. May The God be beneficial to us. May agni be beneficial to us. All these do not give thinking and anger to anyone on earth. (8)
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