हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 35.3

अध्याय 35 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
वा॒युः पु॑नातु सवि॒ता पु॑नात्व॒ग्नेर्भ्राज॑सा॒ सूर्य॑स्य॒ वर्च॑सा।वि मु॑च्यन्तामु॒स्रियाः॑ ॥ (३)
वायु देव व सविता देव इस स्थान को पवित्र बनाने की कृपा करों. सूर्य देव इस स्थान को वर्चस्वी बनाने की कृपा करें. बंधे हुए गायों और बैलों को खोल दिया जाए. (३)
Please vayu dev and savita dev to make this place holy. May the Sun God be pleased to make this place dominated. Tied cows and bulls should be opened. (3)