हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 35.19

अध्याय 35 → मंत्र 19 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
क्र॒व्याद॑म॒ग्निं प्र हि॑णोमि दू॒रं य॑म॒राज्यं॑ गच्छतु रिप्रवा॒हः।इ॒हैवायमित॑रो जा॒तवे॑दा दे॒वेभ्यो॑ ह॒व्यं व॑हतु प्रजा॒नन् ॥ (१९)
हम क्रव्याद अग्नि को दूर करते हैं. हम उस से दूर यमराज्य में जाने का निवेदन करते हैं. सर्वज्ञ अग्नि हमारे घरों में होने वाले यज्ञ में बढ़ोतरी पाएं. अग्नि हमारी हवि को वहन करने व उसे देवताओं तक पहुंचाने की कृपा करें. (१९)
We remove the agni. We request him to go away to Yamrajya. May the omniscient agni increase the yajna in our homes. Please carry agni to our havi and bring it to the gods. (19)