हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 37.17

अध्याय 37 → मंत्र 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अप॑श्यं गो॒पामनि॑पद्यमान॒मा च॒ परा॑ च प॒थिभि॒श्चर॑न्तम्।स स॒ध्रीचीः॒ स विषू॑ची॒र्वसा॑न॒ऽआ व॑रीवर्त्ति॒ भुव॑नेष्व॒न्तः ॥ (१७)
हम सूर्य देव को गोपथ पर आतेजाते हुए देखते हैं. सूर्य देव सर्वरक्षक, सर्वश्रेष्ठ अविनाशी हैं. सूर्य देव देवताओं के पथ से आनेजाने बाले हैं. वह सूर्य देव सभी लोकों के द्रष्टा हैं. (१७)
We see The Sun God coming to Gopath. Surya Dev Is The Protector, The Best Indestructible. The Sun God comes from the path of the gods. That Sun God is the seer of all worlds. (17)