हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

अध्याय 4 के सभी मंत्र

यजुर्वेद अध्याय 4 के सभी मंत्र हिंदी अर्थ के साथ

यजुर्वेद (अध्याय 4)

यजुर्वेद:
एदम॑गन्म देव॒यज॑नं पृथि॒व्या यत्र॑ दे॒वासो॒ऽअजु॑षन्त॒ विश्वे॑। ऋ॒क्सा॒माभ्या॑ स॒न्तर॑न्तो॒ यजु॑र्भी रा॒यस्पोषे॑ण॒ समि॒षा म॑देम। इ॒माऽआपः॒ शमु॑ मे सन्तु दे॒वीरोष॑धे॒ त्राय॑स्व॒ स्वधि॑ते॒ मैन॑ꣳहिꣳसीः ॥ (१)
जिस यज्ञ स्थान पर सारे देवता प्रसन्न होते हैं, हम सभी यजमान उसी स्थल पर इकठठे हुए हैं. ऋग्वेद और सामवेद के मंत्रों से हम यज्ञ के पार जाते हैं. यजुर्वेद के मंत्रों से यज्ञ करते हुए हम धन और पोषण प्राप्त करते हैं. ये जल हमारे लिए शांतिदायी हों. दिव्य गुणों वाली ओषधियां हमें रोगों से बचाएं. ये अस्त्रशस्त्र (अनावश्यक) हिंसाकारी न हों. (१)
At the place of yajna where all the gods are pleased, all of us hosts are gathered at the same place. With the mantras of Rigveda and Samaveda, we go beyond the yajna. We get wealth and nutrition by performing yajna with the mantras of Yajurveda. May these waters be peaceful for us. Do medicines with divine qualities protect us from diseases. These weapons should not be (unnecessary) violent. (1)

यजुर्वेद (अध्याय 4)

यजुर्वेद:
आपो॑ऽअ॒स्मान् मा॒तरः॑ शुन्धयन्तु घृ॒तेन॑ नो घृत॒प्वः पुनन्तु। विश्व॒ꣳ हि रि॒प्रं प्र॒वह॑न्ति दे॒वीरुदिदा॑भ्यः॒ शुचि॒रा पू॒तऽए॑मि। दी॒क्षा॒त॒पसो॑स्त॒नूर॑सि॒ तां त्वा॑ शि॒वा श॒ग्मां परि॑दधे भ॒द्रं वर्णं॒ पुष्य॑न् ॥ (२)
जल हमारी मां है. जल हमें शोधित (शुद्ध) करने की कृपा करे. घी से जो जल झरता है, वह हमें पवित्र करने की कृपा करे. प्रबाहित होता हुआ जल सभी पापों को धो दे. जल से हम शुद्ध और पवित्र होते हैं. हे रेशमी वस्त्र! आप दीक्षातपस देव का शरीर हो. आप कोमल, सुखद, कल्याणकारी व श्रेष्ठ (सुंदर) रंग बाले हैं. हम आप को (यज्ञ में) धारण करते हैं. (२)
Water is our mother. May water please purify us. May the water that flows from ghee be pleased to sanctify us. May the flowing water wash away all sins. We are pure and pure with water. O silk cloth! You are the body of Deekshatapas Dev. You are gentle, pleasant, welfare and beautiful. We hold you (in the yagna). (2)

यजुर्वेद (अध्याय 4)

यजुर्वेद:
म॒हीनां॒ पयो॑ऽसि वर्चो॒दाऽअ॑सि॒ वर्चो॑ मे देहि। वृ॒त्रस्या॑सि क॒नीन॑कश्चक्षु॒र्दाऽअ॑सि॒ चक्षु॑र्मे देहि ॥ (३)
आप गायों का दूध हैं. आप वर्चस्व (चमक) देने बाले हैं. आप हमें वर्चस्व प्रदान कीजिए. आप वृत्र की आंख की पुतली हैं. आप आंख देने बाले हैं. आप हमें आंख प्रदान कीजिए. (३)
You are the milk of cows. You are the giver of supremacy (shine). You give us supremacy. You are the pupil of the eye of the tree. You are eye-giving. You give us an eye. (3)

यजुर्वेद (अध्याय 4)

यजुर्वेद:
चि॒त्पति॑र्मा पुनातु वा॒क्पति॑र्मा पुनातु दे॒वो मा॑ सवि॒ता पु॑ना॒त्वच्छि॑द्रेण प॒वित्रे॑ण॒ सूर्य॑स्य र॒श्मिभिः॑। तस्य॑ ते पवित्रपते प॒वित्र॑पूतस्य॒ यत्का॑मः पु॒ने तच्छ॑केयम् ॥ (४)
आप चित्त (मन) के पति (स्वामी) हैं. आप हमें पवित्र कीजिए. आप वाणी के स्वामी हैं. आप हमें पवित्र बनाइए. दोष (छिट्रों) से रहित सविता देव हमें पवित्र करने की कृपा करों. सूर्य अपनी किरणों से हमें पवित्र बनाएं. हे पवित्रपति! हम आप के पुत्र हैं. हम पवित्र हो कर अपनी मनोकामना पूर्ण करें, ताकि हम और अधिक यज्ञ करने योग्य हो सकें. (४)
You are the husband (master) of the mind. You sanctify us. You are the master of speech. You make us holy. May Savita Dev, dev, without defects, bless us. Make us holy with the sun's rays. O Holy Lord! We are your sons. Let us become pure and fulfill our wishes, so that we can be able to perform more sacrifices. (4)

यजुर्वेद (अध्याय 4)

यजुर्वेद:
आ वो॑ देवासऽईमहे वा॒मं प्र॑य॒त्यध्व॒रे। आ वो॑ देवासऽआ॒शिषो॑ य॒ज्ञिया॑सो हवामहे ॥ (५)
हे देवताओ! हम इस यज्ञ के आरंभ में अपनी इच्छापूर्ति के लिए आप को आमंत्रित करते हैं. हे देवताओ! हम याज्ञिक (यज्ञ करने वाले) आशीर्वाद और यज्ञ फल की प्राप्ति के लिए आप का आह्वान करते हैं. (५)
O gods! We invite you to fulfill your wish at the beginning of this yajna. O gods! We call upon you to get yagnik (yajna performers) blessings and yajna fruits. (5)

यजुर्वेद (अध्याय 4)

यजुर्वेद:
स्वाहा॑ य॒ज्ञं मन॑सः॒ स्वाहो॑रोर॒न्तरि॑क्षा॒त् स्वाहा॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॒ स्वाहा॒ वाता॒दार॑भे॒ स्वाहा॑ ॥ (६)
हे यज्ञ देव! हम मन से यज्ञ करते हैं. उन के लिए स्वाहा. अंतरिक्षलोक, स्वर्गलोक च पृथ्वीलोक के लिए स्वाहा. हम वायु को यज्ञ के आरंभ में ही आहुति अर्पित करते हैं.(६)
O Sacrificial God! We perform yajna with our heart. Swaha for them. Space, heaven, heaven for earth. We offer sacrifices to the air at the beginning of the yajna. (6)

यजुर्वेद (अध्याय 4)

यजुर्वेद:
आकू॑त्यै प्र॒युजे॒ऽग्नये॒ स्वाहा॑ मे॒धायै॒ मन॑से॒ऽग्नये॒ स्वाहा॑ दी॒क्षायै॒ तप॑से॒ऽग्नये॒ स्वाहा॒ सर॑स्वत्यै पू॒ष्णेऽग्नये॒ स्वाहा॑। आपो॑ देवीर्बृहतीर्विश्वशम्भुवो॒ द्यावा॑पृथिवी॒ऽउरो॑ऽन्तरिक्ष। बृह॒स्पत॑ये ह॒विषा॑ विधेम॒ स्वाहा॑ ॥ (७)
अग्नि यज्ञ के संकल्प की प्रेरणा देने वाले हैं. उन के लिए स्वाहा. अग्नि यज्ञ की बुद्धि देते हैं. यज्ञ करने में मन को प्रेरित करते हैं. अग्नि के लिए स्वाहा. दीक्षा और तप की सिद्धि हेतु अग्नि को यह आहुति दी जाती है. सरस्वती देवी के लिए स्वाहा. पूषा देव के लिए स्वाहा. अग्नि के लिए स्वाहा. हे जल देव! आप के लिए स्वाहा. संसार के पालक शंभु देव के लिए स्वाहा. स्वर्गलोक के लिए स्वाहा. पृथ्वीलोक के लिए स्वाहा. विशाल अंतरिक्षलोक के लिए स्वाहा. हम बृहस्पति के लिए हवि समर्पित करते हैं. उन के लिए स्वाहा. (७)
He is the inspiration for the resolution of agni yajna. Swaha for them. They give the wisdom of agni sacrifice. Motivates the mind to perform yajna. Swaha for agni. This sacrifice is given to agni for the accomplishment of initiation and penance. Swaha for Saraswati Devi. Swaha for Pusha Dev. Swaha for agni. O God of Water! Swaha for you. Swaha for Shambhu Dev, the guardian of the world. Swaha for heaven. Swaha for the earth. Swaha for the vast spaceland. We dedicate Havi to Jupiter. Swaha for them. (7)

यजुर्वेद (अध्याय 4)

यजुर्वेद:
विश्वो॑ दे॒वस्य॑ ने॒तुर्मर्त्तो॑ वुरीत स॒ख्यम्। विश्वो॑ रा॒यऽइ॑षुध्यति द्यु॒म्नं वृ॑णीत पु॒ष्यसे॒ स्वाहा॑ ॥ (८)
सविता देव सभी देवों का नेतृत्व करने बाले हैं. वे वरेण्य (श्रेष्ठ) गुणों वाले हैं. हम उन की मित्रता पाना चाहते हैं. हम उन से सभी प्रकार के वैभव चाहते हैं. हम सब के लिए उन से धन प्राप्ति की चाह रखते हैं. हम स्वर्गदायी वैभव (यशस्वी) चाहते हैं. हम प्रजा का पोषण करने के लिए धन चाहते हैं. सविता देव के लिए स्वाहा. (८)
Savita Dev is the leader of all the gods. They have varenya (superior) qualities. We want to be friends with them. We want all kinds of splendour from them. We all want to get money from them. We want heavenly glory . We want money to nurture the people. Swaha for Savita Dev. (8)
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