हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 4.6

अध्याय 4 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
स्वाहा॑ य॒ज्ञं मन॑सः॒ स्वाहो॑रोर॒न्तरि॑क्षा॒त् स्वाहा॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॒ स्वाहा॒ वाता॒दार॑भे॒ स्वाहा॑ ॥ (६)
हे यज्ञ देव! हम मन से यज्ञ करते हैं. उन के लिए स्वाहा. अंतरिक्षलोक, स्वर्गलोक च पृथ्वीलोक के लिए स्वाहा. हम वायु को यज्ञ के आरंभ में ही आहुति अर्पित करते हैं.(६)
O Sacrificial God! We perform yajna with our heart. Swaha for them. Space, heaven, heaven for earth. We offer sacrifices to the air at the beginning of the yajna. (6)