यजुर्वेद (अध्याय 4)
प्रति॒ पन्था॑मपद्महि स्वस्ति॒गाम॑ने॒हस॑म्। येन॒ विश्वाः॒ परि॒ द्विषो॑ वृ॒णक्ति॑ वि॒न्दते॒ व॒सु॑ ॥ (२९)
हे अग्नि! हम उस मार्ग का अनुसरण करें जो मंगलमय व सुगम हो, जिस पथ पर जाने से द्वेषियों का पूरी तरह नाश हो और हमें धन की प्राप्ति हो. (२९)
O agni! We should follow the path which is auspicious and easy, by going on the path, the hatreds are completely destroyed and we get money. (29)