हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 4.32

अध्याय 4 → मंत्र 32 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
सूर्य॑स्य॒ चक्षु॒रारो॑हा॒ग्नेर॒क्ष्णः क॒नीन॑कम्। यत्रैत॑शेभि॒रीय॑से॒ भ्राज॑मानो विप॒श्चिता॑ ॥ (३२)
हे बरुण देव! आप सूर्य के चक्षु हैं. आप अग्नि की आंख हैं. आप आंख की पुतली पर आरोहण की कृपा कीजिए. आप प्रकाशमान हैं. आप यहां शोभित होने की कृपा कीजिए. (३२)
O God! You are the eye of the sun. You are the eye of agni. Please climb the pupil of the eye. You are shining. Please be graceful here. (32)