हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 40.11

अध्याय 40 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
सम्भू॑तिं च विना॒शं च॒ यस्तद्वेदो॒भय॑ꣳ स॒ह।वि॒ना॒शेन॑ मृ॒त्युं ती॒र्त्वा सम्भू॑त्या॒मृत॑मश्नुते ॥ (११)
सृजन और विनाश इन दोनों को साथसाथ ही समझिए. विनाश से मृत्यु को तैरकर और सृजन से अमृत की प्राप्ति की जाती है. (११)
Understand both creation and destruction together. Nectar is obtained by floating death from destruction and by creation. (11)