यजुर्वेद (अध्याय 5)
र॒क्षो॒हणं॑ बलग॒हनं॑ वैष्ण॒वीमि॒दम॒हं तं ब॑ल॒गमुत्कि॑रामि॒ यं मे॒ निष्ट्यो॒ यम॒मात्यो॑ निच॒खाने॒दम॒हं तं ब॑ल॒गमुत्कि॑रामि॒ यं मे॑ समा॒नो यमस॑मानो निच॒खाने॒दम॒हं तं ब॑ल॒गमुत्कि॑रामि॒ यं मे॒ सब॑न्धु॒र्यमस॑बन्धुर्निच॒खाने॒दम॒हं तं ब॑ल॒गमुत्कि॑रामि॒ यं मे॑ सजा॒तो यमस॑जातो निच॒खानोत्कृ॒त्य-ङ्कि॑रामि ॥ (२३)
राक्षसों का हनन करने वाले मंत्रपाठ कीजिए. अतिचार साधनों का नाश करने बाले मंत्रपाठ कीजिए. पोषणता देने बाले मंत्रपाठ कीजिए. अभिचार साधनों का नाश करने वाले मंत्रपाठ कीजिए. अनिष्ट निवारण हेतु मंत्रपाठ कीजिए. छिपा कर रखे हुए अनिष्टकर साधनों के नाश हेतु मंत्रपाठ कीजिए. छिपा कर रखे हुए अभिचार साधनों को हम खोद कर उखाड़ फेंकते हैं. हमारे सजातियों ने जो अनिष्टकारी प्रयोग किए हैं, हम उन्हें खोद कर उखाड़ फेंकते हैं. (२३)
Recite mantras that violate demons. Recite mantras to destroy trespassing means. Recite mantras that give nutrition. Recite mantras that destroy the means of communication. Recite mantras for evil prevention. Recite mantras to destroy the hidden evil means. We dig out the hidden means of conduct. We dig out the evil experiments that our sajatis have done. (23)