यजुर्वेद (अध्याय 5)
अ॒यं नो॑ऽअ॒ग्निर्वरि॑वस्कृणोत्व॒यं मृधः॑ पु॒रऽए॑तु प्रभि॒न्दन्। अ॒यं वाजा॑ञ्जयतु॒ वाज॑साताव॒यꣳ शत्रू॑ञ्जयतु॒ जर्हृ॑षाणः॒ स्वाहा॑ ॥ (३७)
यह अग्नि हमें वरण करने योग्य धन प्रदान करें. यह शत्रु नाश करते हुए हमारे सम्मुख पधारें. यह हमारे लिए अन्न जीतें. हमारे लिए बल जीते. यह हमारे लिए शत्रुओं से जीतें. यह हमारी आहुति स्वीकारने की कृपा करों. (३७)
May this agni give us selectable wealth. Let these enemies come before us, destroying them. Let it win food for us. Win the force for us. Win it against enemies for us. Please accept our sacrifice. (37)