हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 6.25

अध्याय 6 → मंत्र 25 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
हृ॒दे त्वा॒ मन॑से त्वा॒ दि॒वे त्वा॒ सूर्या॑य त्वा। ऊ॒र्ध्वमि॒मम॑ध्व॒रं दि॒वि दे॒वेषु॒ होत्रा॑ यच्छ ॥ (२५)
हे देवगण! आप हदय, मन, स्वर्ग और सूर्य में हैं. आप यज्ञ को ऊंचा उठाएं, यजमान को दिव्यता दें. यजमान को स्वर्ग दें.(२५)
O Gods! You are in heart, mind, heaven and sun. You raise the yajna, give divinity to the host. Give heaven to the host. (25)