यजुर्वेद (अध्याय 7)
उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि ध्रु॒वोऽसि ध्रु॒वक्षि॑तिर्ध्रु॒वाणां॑ ध्रु॒वत॒मोऽच्यु॑तानामच्युत॒क्षित्त॑मऽए॒ष ते॒ योनि॑र्वैश्वान॒राय॑ त्वा। ध्रु॒वं ध्रु॒वेण॒ मन॑सा वा॒चा सोम॒मव॑नयामि। अथा॑ न॒ऽइन्द्र॒ऽइद्विशो॑ऽसप॒त्नाः सम॑नस॒स्कर॑त् ॥ (२५)
हे सोम! आप ध्रुव (स्थिर) और पृथ्वी पर शुव रहने वालों में अग्रगण्य हैं. आप श्रुवतम के नाम से प्रसिद्ध हैं. आप सब का मूल स्थान व आश्रय स्थान हैं. श्रुव मन बाले यजमान हम ध्रुव मन से वाणीपूर्वक आप को नमन करते हैं. इंद्र देव हम पत्नी और संतान सहित अच्छे मन से आप को नमन करते हैं. (२५)
O Mon! You are the forerunner among those who live in the pole (stable) and the earth. You are famous as Shruvatam. You are everyone's native place and shelter. We bow down to you with a pole mind. Indra Dev, we bow to you with a good heart including wife and children. (25)