हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 7.34

अध्याय 7 → मंत्र 34 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
विश्वे॑ देवास॒ऽआग॑त शृणु॒ता म॑ऽइ॒मꣳ हव॑म्। एदं ब॒र्हिर्निषी॑दत। उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि॒ विश्वे॑भ्यस्त्वा दे॒वेभ्य॑ऽए॒ष ते॒ योनि॒र्विश्वे॑भ्यस्त्वा दे॒वेभ्यः॑ ॥ (३४)
हे विशव देव! आप हमारी प्रार्थनाएं सुनिए. आप पधारने की कृपा कीजिए. हम आप से यहां कुश के आसन पर बैठने का अनुरोध करते हैं. आप उस आसन पर बिराजने की कृपा कीजिए. आप को सभी देवताओं के लिए कलश में ग्रहण किया गया है. यही आप का और देवताओं का मूल स्थान है. (३४)
O God! Listen to our prayers. Please come. We request you to sit on the seat of Kush here. Please sit on that seat. You have been absorbed in the urn for all the gods. This is the original place of you and the gods. (34)