यजुर्वेद (अध्याय 7)
अ॒यं नो॑ऽअ॒ग्निर्वरि॑वस्कृणोत्व॒यं मृधः॑ पु॒रऽए॑तु प्रभि॒न्दन्। अ॒यं वाजा॑ञ्जयतु॒ वाज॑साताव॒यꣳ शत्रू॑ञ्जयतु॒ जर्हृ॑षाणः॒ स्वाहा॑ ॥ (४४)
हे अग्नि! हमारे दुश्मनों का भेद दीजिए व उन को हरा दीजिए. हमारे दुश्मनों के नगर भेद दीजिए. हमारे दुश्मनों की जमा पूंजी हमें दे दीजिए. शत्रुओं को पराजित करने वाले अग्नि के लिए स्वाहा. (४४)
O agni! Divide our enemies and defeat them. Divide the cities of our enemies. Give us the accumulated capital of our enemies. Swaha for agni that defeats enemies. (44)