हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 8.19

अध्याय 8 → मंत्र 19 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
याँ२ऽआव॑हऽउश॒तो दे॑व दे॒वाँस्तान् प्रेर॑य॒ स्वेऽअ॑ग्ने स॒धस्थे॑। ज॒क्षि॒वासः॑ पपि॒वास॑श्च॒ विश्वेऽसुं॑ घ॒र्मꣳ स्व॒राति॑ष्ठ॒तानु॒ स्वाहा॑ ॥ (१९)
हे अग्नि! आप ने जिन का आह्वान किया है, उन देवों को अपनेअपने स्थान पर प्रतिष्ठित करने की कृपा कीजिए. आप यज्ञ में दी गई हवि सारे यज्ञ की आहुतियां ग्रहण करने की कृपा कीजिए. हम आप के लिए आहुतियां अर्पित करते हैं. (१९)
O agni! Please establish the gods you have called for in your place. Please accept the sacrifices of all the sacrifices given in the yajna. We offer sacrifices to you. (19)