यजुर्वेद (अध्याय 8)
उ॒त्तिष्ठ॒न्नोज॑सा स॒ह पी॒त्वी शिप्रे॑ऽअवेपयः। सोम॑मिन्द्र च॒मू सु॒तम्। उ॒प॒या॒मगृ॑हीतो॒ऽसीन्द्रा॑य॒ त्वौज॑सऽए॒ष ते॒ योनि॒रिन्द्रा॑य॒ त्वौज॑से। इन्द्रौ॑जि॒ष्ठौजि॑ष्ठ॒स्त्वं दे॒वेष्वस्योजि॑ष्ठो॒ऽहं म॑नु॒ष्येषु भृयासम् ॥ (३९)
हे इंद्र देव! आप ओज के साथ उठिए. आप सुंदर ठोड़ी वाले हैं. आप इस पेय का पान कीजिए. हे सोम! इंद्र के लिए आप को चुआ रहे हैं. सोम को इंद्र देव के लिए कलश में ग्रहण किया गया है. यह इंद्र देव का मूल निवास है. हम ओज के लिए आप को ग्रहण करते हैं. इंद्र देव ओजवान हैं. वे देवताओं में ओजवान हैं, वैसे ही हम मनुष्यों में ओजवान हो जाएं. (३९)
O Lord Indra! You get up with oz. You have beautiful chins. Drink this drink. O Mon! You are being kissed for Indra. Som has been taken in the kalash for Indra Dev. It is the original abode of Indra Dev. We accept you for Oz. Indra Dev is Ojawan. They are powerful in the gods, just as we become powerful in human beings. (39)