यजुर्वेद (अध्याय 8)
उदु॒ त्यं जा॒तवे॑दसं दे॒वं व॑हन्ति के॒तवः॑। दृ॒शे विश्वा॑य॒ सूर्य॑म्। उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि॒ सूर्या॑य त्वा भ्रा॒जायै॒ष ते॒ योनिः॒ सूर्या॑य त्वा भ्रा॒जाय॑ ॥ (४१)
ये सूर्य की किरणें विश्वविख्यात हैं. ये दिव्यता वहन करती हैं. सूर्य की किरणें सारे संसार को दूष्टि प्रदान करती हैं. हे सोम! आप को कलश में ग्रहण किया है. आप को प्रकाशमान सूर्य के लिए ग्रहण किया है. यही आप का मूल स्थान है. आप सूर्य के लिए प्रकाशित होइए. (४१)
These sun rays are world famous. These divinity carries. The rays of the sun provide mist to the whole world. O Mon! You have to be eclipsed in the urn. You have to eclipse the shining sun. This is your native place. You get illuminated to the sun. (41)