हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 9.6

अध्याय 9 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
देवी॑रापो॒ यो व॑ऽऊ॒र्मिः प्रतू॑र्तिः क॒कुन्मा॑न् वाज॒सास्तेना॒यं वाज॑ꣳ सेत् । अ॒प्स्वन्तर॒मृत॑म॒प्सु भे॑ष॒जम॒पामु॒त प्रश॑स्ति॒ष्वश्वा॒ भव॑त वा॒जिनः॑ ॥ (६)
जल के भीतर अमृत व ओषधियां हैं. हम उन का सेवन कर के घोड़े की तरह बलवान हो जाएं. हे जल समूह! आप की तरंगें ऊंची हैं और लहरें वेगशाली हैं. आप की ऊंचीऊंची तरंगें हमें अन्न प्रदान करने की कृपा करें. (६)
There are nectar and medicines inside the water. Let us eat them and become strong like horses. O water group! Your waves are high and the waves are fast. May your high waves please provide us food. (6)