यजुर्वेद (अध्याय 9)
इन्द्र॑स्य॒ वज्रो॑ऽसि वाज॒सास्त्वया॒यं वाज॑ꣳ सेत्। वाज॑स्य॒ नु प्र॑स॒वे मा॒तरं॑ म॒हीमदि॑तिं॒ नाम॒ वच॑सा करामहे। यस्या॑मि॒दं विश्वं॒ भुव॑नमावि॒वेश॒ तस्यां॑ नो दे॒वः स॑वि॒ता धर्म॑ साविषत् ॥ (५)
आप इंद्र देव के वज्र और अन्नमय हैं. आप से यजमान को भी अन प्राप्त हो. हम अपनी (मंत्रमय) वाणी से धरती को अन्न उपजाने के लिए प्रेरित करते हैं. पृथ्वी को देवों की माता अदिति के समान प्रेरित करते हैं. सारा संसार (लोक) सव्रता देव के वश में है. सविता हमें धार्मिक बनाएं. वे हमें गतिशील बनाने की कृपा करें. (५)
You are indra dev's vajra and annamaya. The host also gets it from you. We inspire the earth to grow food with our (mantra) speech. Inspires the earth like Aditi, the mother of gods. The whole world (folk) is under the control of Savrata Dev. Savita make us religious. Please make us dynamic. (5)