हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 1.11.3

कांड 1 → सूक्त 11 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
सू॒षा व्यू॑र्णोतु॒ वि योनिं॑ हापयामसि । श्र॒थया॑ सूषणे॒ त्वमव॒ त्वं बि॑ष्कले सृज ॥ (३)
प्रसव की देवता पूषा गर्भ को जरायु के बंधन से अलग करें. हम भी सुखपूर्वक प्रसव के लिए योनि मार्ग को खोल रहे हैं. तुम भी सुखपूर्वक प्रसव के लिए योनि मार्ग को शिथिल करो. हे सूतिमारुत देव! आप भी गर्भ का मुख नीचे को कर के उसे बाहर निकलने हेतु प्रेरित करो. (३)
Pusha, the god of childbirth, separates the womb from the bondage of jarayu. We are also opening the vaginal route for spontaneous delivery. You also relax the vaginal passage for a happy delivery. O God! You should also push the face of the womb down and motivate her to get out. (3)