हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 1.11.4

कांड 1 → सूक्त 11 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
नेव॑ मां॒से न पीव॑सि॒ नेव॑ म॒ज्जस्वाह॑तम् । अवै॑तु॒ पृश्नि॒ शेव॑लं॒ शुने॑ ज॒राय्वत्त॒वेऽव॑ ज॒रायु॑ पद्यताम् ॥ (४)
हे प्रसव करने वाली नाड़ी! तू इस उदरगत जरायु से पुष्ट नहीं होगी, क्योंकि इस का संबंध मांस, मज्जा आदि से नहीं है. इसलिए उजले रंग की यह जरायु दोनों के ऊपर तैरने वाली काई के समान नीचे गिर जाए. इसे कुत्ते के खाने के लिए नीचे गिर जाने दें. (४)
O delivery pulse! You will not be confirmed by this abdominal geria, because it is not related to meat, marrow, etc. Therefore, this white colored jarring should fall down like the moss floating on top of both. Let it fall down for the dog to eat. (4)