अथर्ववेद (कांड 1)
यथा॒ वातो॒ यथा॒ मनो॒ यथा॒ पत॑न्ति प॒क्षिणः॑ । ए॒वा त्वं द॑शमास्य सा॒कं ज॒रायु॑णा प॒ताव॑ ज॒रायु॑ पद्यताम् ॥ (६)
हे दशमास गर्भस्थ शिशु! जिस प्रकार वायु, मन एवं आकाश में उड़ने वाले पक्षी आकाश में बिना रोकटोक के विचरण करते हैं, उसी प्रकार तू जरायु के साथ गर्भ से बाहर आ. जरायु गर्भाशय से नीचे गिरे. (६)
O baby in the womb of the tenth month! Just as the air, mind and birds flying in the sky roam in the sky without restriction, so you come out of the womb with a young age. (6)