हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 1.18.3

कांड 1 → सूक्त 18 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
यत्त॑ आ॒त्मनि॑ त॒न्वां॑ घो॒रमस्ति॒ यद्वा॒ केशे॑षु प्रति॒चक्ष॑णे वा । सर्वं॒ तद्वा॒चाप॑ हन्मो व॒यं दे॒वस्त्वा॑ सवि॒ता सू॑दयतु ॥ (३)
हे पुरुष! तेरे अपने शरीर, केशों एवं नेत्रों के जो बुरे लक्षण हैं, हम मंत्र रूपी वाणी से उन सभी बुरे लक्षणों का विनाश करते हैं. सविता देव तुझे कल्याण की प्रेरणा दें. (३)
O man! The bad symptoms of your own body, hair and eyes, we destroy all those bad symptoms with the speech of mantras. May Savita Dev inspire you for welfare. (3)