हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 6
शं नो॑ दे॒वीर॒भिष्ट॑य॒ आपो॑ भवन्तु पी॒तये॑ । शं योर॒भि स्र॑वन्तु नः ॥ (१)
दिव्यगुणों वाला जल सभी ओर से हमारा कल्याण करने वाला हो. जल हमारे चारों ओर कल्याण की वर्षा करे एवं पीने के लिए उपलब्ध हो. (१)
May the water with divine qualities benefit us from all sides. May water rain welfare around us and be available for drinking. (1)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 6
अ॒प्सु मे॒ सोमो॑ अब्रवीद॒न्तर्विश्वा॑नि भेष॒जा । अ॒ग्निं च॑ वि॒श्वशं॑भुवम् ॥ (२)
मुझे सोम ने बताया है कि सारी ओषधियां एवं अग्नि जल में निवास करती हैं. अग्नि सारे संसार का कल्याण करने वाली है. (२)
I have been told by Som that all medicines and agnis reside in water. Agni is the welfare of the whole world. (2)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 6
आपः॑ पृणी॒त भे॑ष॒जं वरू॑थं त॒न्वे॑३ मम॑ । ज्योक्च॒ सूर्यं॑ दृ॒शे ॥ (३)
हे जल! तुम मेरे रोगों का निवारण करने के लिए ओषधियां प्रदान करो. अधिक समय तक सूर्य के दर्शन करने के लिए तुम मेरे शरीर को पुष्ट करो. (३)
O water! You provide medicines to cure my diseases. Strengthen my body to see the sun for a longer time. (3)

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 6
शं न॒ आपो॑ धन्व॒न्या॑३ शमु॑ सन्त्वनू॒प्याः॑ । शं नः॑ खनि॒त्रिमा॒ आपः॒ शमु॒ याः कु॒म्भ आभृ॑ताः । शि॒वा नः॑ सन्तु॒ वार्षि॑कीः ॥ (४)
जल हमें मरु भूमि में सुखकारी हों. जिन स्थानों में जल की प्राप्ति सुलभ है, वहां के जल हमारा कल्याण करें. कुआं, बावड़ी आदि खोद कर प्राप्त किए गए जल हमारे लिए कल्याणकारी हों. घड़े में भर कर लाया गया जल हमें सुख दे. वर्षा से प्राप्त होने वाला जल हमारे लिए सुखकारी हो. (४)
May water make us happy in the desert land. In places where water is accessible, may the water of the places be well-being. The water obtained by digging wells, stepwells etc. should be beneficial for us. May the water brought in the pitcher give us happiness. May the water obtained from rain be pleasant for us. (4)