हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 1.6.2

कांड 1 → सूक्त 6 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 1)

अथर्ववेद: | सूक्त: 6
अ॒प्सु मे॒ सोमो॑ अब्रवीद॒न्तर्विश्वा॑नि भेष॒जा । अ॒ग्निं च॑ वि॒श्वशं॑भुवम् ॥ (२)
मुझे सोम ने बताया है कि सारी ओषधियां एवं अग्नि जल में निवास करती हैं. अग्नि सारे संसार का कल्याण करने वाली है. (२)
I have been told by Som that all medicines and agnis reside in water. Agni is the welfare of the whole world. (2)