हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.1.13

कांड 10 → सूक्त 1 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
यथा॒ वात॑श्च्या॒वय॑ति॒ भूम्या॑ रे॒णुम॒न्तरि॑क्षाच्चा॒भ्रम् । ए॒वा मत्सर्वं॑ दुर्भू॒तं ब्रह्म॑नुत्त॒मपा॑यति ॥ (१३)
वायु जिस प्रकार धरती से धूल को और आकाश में मेघों को उड़ा ले जाती है, उसी प्रकार मंत्रों का बल मेरे सभी पापों को दूर करे. (१३)
Just as the wind blows dust from the earth and the clouds in the sky, in the same way, the force of mantras removes all my sins. (13)