हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.1.24

कांड 10 → सूक्त 1 → मंत्र 24 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
यद्ये॒यथ॑ द्वि॒पदी॒ चतु॑ष्पदी कृत्या॒कृता॒ संभृ॑ता वि॒श्वरू॑पा । सेतो॒ष्टाप॑दी भू॒त्वा पुनः॒ परे॑हि दुच्छुने ॥ (२४)
हे कृत्या! तेरा निर्माण करने वालों ने तुझे दो पैरों वाली अथवा चार पैरों वाली बनाया है. यदि तू हमारे समीप आ रही है तो आठ पैरों वाली बन कर यहां से लौट जा. (२४)
O act! Those who built you have made you two-legged or four-legged. If you are coming near us, then become eight feet and return from here. (24)