अथर्ववेद (कांड 10)
को अ॑स्मिन्य॒ज्ञम॑दधा॒देको॑ दे॒वोऽधि॒ पूरु॑षे । को अ॑स्मिन्त्स॒त्यं कोऽनृ॑तं॒ कुतो॑ मृ॒त्युः कुतो॒ऽमृत॑म् ॥ (१४)
किस प्रधान देव ने इस पुरुष में यज्ञ रूप कर्म को स्थापित किया है? इस में सत्य, असत्य, अमृत और मृत्यु की स्थापना किस ने की? (१४)
Which chief god has established yajna form karma in this man? Who established truth, untruth, nectar and death in this? (14)