हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.2.15

कांड 10 → सूक्त 2 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
को अ॑स्मै॒ वासः॒ पर्य॑दधा॒त्को अ॒स्यायु॑रकल्पयत् । बलं॒ को अ॑स्मै॒ प्राय॑च्छ॒त्को अ॑स्याकल्पयज्ज॒वम् ॥ (१५)
इस पुरुष के शरीर पर त्वचा रूपी वस्त्र किस ने रखा और इस की आयु की रचना किस देव ने की? इस पुरुष के लिए बल किस देव ने प्रदान किया और किसने इसे गति दी? (१५)
Who put the skin cloth on this man's body and which god created his age? Which god provided the force for this man and who gave it momentum? (15)