हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.2.9

कांड 10 → सूक्त 2 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
प्रि॑याप्रि॒याणि॑ बहु॒ला स्वप्नं॑ संबाधत॒न्द्र्यः । आ॑न॒न्दानु॒ग्रो नन्दां॑श्च॒ कस्मा॑द्वहति॒ पूरु॑षः ॥ (९)
मनुष्य के प्रिय और अप्रिय स्वप्नों को, संबंधित इंद्रियों को, आनंद को तथा दुःख को कौन सा देव धारण करता है? (९)
Which God holds man's beloved and unpleasant dreams, related senses, joy and sorrow? (9)