अथर्ववेद (कांड 10)
ब्रह्मा॒भ्याव॑र्ते । तन्मे॒ द्रवि॑णं यच्छन्तु॒ तन्मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम् ॥ (४०)
मैं ब्रह्म का अनुवर्तन करता हूं. वह मुझे धन प्रदान करे और ब्रह्म तेज दे. (४०)
I follow Brahman. May he give me wealth and give Brahm tej. (40)
कांड 10 → सूक्त 5 → मंत्र 40 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation