हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.6.11

कांड 10 → सूक्त 6 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 6
यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ । सो अ॑स्मै वा॒जिन॒मिद्दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि ॥ (११)
बृहस्पति ने जिस को यह मणि वायु के समान शीघ्र गति प्राप्त करने के लिए बांधी, उस के लिए यह मणि प्रतिदिन एवं बारबार घोड़े प्रदान करे. हे यजमान! उन की सहायता से तू अपने शत्रुओं का विनाश कर. (११)
For the person to whom Jupiter tied this gem to get as fast as air, this gem should provide horses daily and again. O host! With their help you destroy your enemies. (11)