अथर्ववेद (कांड 10)
यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ । तेने॒मां म॒णिना॑ कृ॒षिम॒श्विना॑व॒भि र॑क्षतः । स भि॒षग्भ्यां॒ महो॑ दुहे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि ॥ (१२)
बृहस्पति देव ने जिसे यह मणि वायु के समान शीघ्र गति प्राप्त करने के लिए बांधी, उसी मणि के द्वारा अश्विनीकुमार इस कृषि की रक्षा करें. इस ने अश्चिनीकुमारों का बारबार एवं प्रतिदिन महत्तव प्रदान किया. हे यजमान! इस मणि की सहायता से तू अपने शत्रुओं का विनाश कर. (१२)
Ashwinikumar should protect this agriculture with the same gem that Jupiter God tied to get this gem as fast as air. It gave importance to the Ashwini Kumars again and again and every day. O host! With the help of this gem, destroy your enemies. (12)