अथर्ववेद (कांड 10)
यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ । तं बिभ्र॑त्सवि॒ता म॒णिं तेने॒दम॑जय॒त्स्वः । सो अ॑स्मै सू॒नृतां॑ दुहे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि ॥ (१३)
बृहस्पति देव ने जिस को यह मणि वायु के समान वेग प्राप्त करने के लिए बांधी थी, उसे धारण करते हुए सविता देव ने स्वर्ग को विजय किया. उस ने यजमान के लिए सत्य प्रदान किया. हे यजमान! इस से तू अपने शत्रुओं का विनाश कर. (१३)
Savita Dev conquered heaven, wearing the velocity of Jupiter to whom this gem was tied to get the same velocity as air. He provided truth for the host. O host! With this you destroy your enemies. (13)