अथर्ववेद (कांड 10)
अ॑न्तर्दे॒शा अ॑बध्नत प्र॒दिश॒स्तम॑बध्नत । प्र॒जाप॑तिसृष्टो म॒णिर्द्वि॑ष॒तो मेऽध॑राँ अकः ॥ (१९)
आग्नेय, ईशान आदि अंतर्दिशाओं ने इस मणि को बांधा तथा पूर्व आदि दिशाओं ने भी इस को बांधा. प्रजापति के द्वारा निर्मित यह मणि मेरे शत्रुओं को पराजित करे. (१९)
The inter-directions like Southeast, Ishan etc. tied this gem and east etc. directions also tied it. May this gem made by Prajapati defeat my enemies. (19)