हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 10.7.12

कांड 10 → सूक्त 7 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 10)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
यस्मि॒न्भूमि॑र॒न्तरि॑क्षं॒ द्यौर्यस्मि॒न्नध्याहि॑ता । यत्रा॒ग्निश्च॒न्द्रमाः॒ सूर्यो॒ वात॑स्तिष्ठ॒न्त्यार्पि॑ताः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (१२)
जिस के आधार पर भूमि, आकाश और स्वर्ग टिके हुए हैं तथा अग्नि, चंद्रमा, सूर्य और वायु जिस में अर्पित हो कर स्थित है, उस परमेश्वर के विषय में बताओ कि वह कोन है? (१२)
Tell us of the God on whose basis the land, the sky, and the heavens rest, and the God in whom the agni, the moon, the sun, and the air are offered, who is He? (12)