अथर्ववेद (कांड 10)
यस्य॒ चत॑स्रः प्र॒दिशो॑ ना॒ड्यस्तिष्ठ॑न्ति प्रथ॒माः । य॒ज्ञो यत्र॒ परा॑क्रान्तः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (१६)
जिस आदि पुरुष के शरीर में प्रथम कल्पित पूर्व, पश्चिम आदि चार दिशाएं नाड़ियों के रूप में स्थित है तथा यज्ञ जहां पराक्रम करता है, उस परमेश्वर के विषय में बताओ कि वह कौन है? (१६)
Tell us about the God in whose body the first imagined east, west, etc. are located in the form of nadis and where the yajna does the might, tell me who he is? (16)